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Wednesday, 9 March 2011

क्षमा करना क्यों है ज़रूरी?

Dear friends, 
इस ज़िन्दगी में इंसान से जाने-अनजाने गलतियाँ होती रहती हैं. जब हम खुद गलती करते हैं तो लगता है कि काश सामने  वाला माफ़ कर दे...पर जब किसी और से गलती होती है तो हम रूठ कर बैठे जाते हैं. और आज AchchiKhabar.Com पर हम इसी subject,यानि Forgiveness पे Mrs. Shikha Mishra द्वारा लिखा एक बेहेतरीन Hindi Article share कर रहे हैं. इसे पढने के बाद Forgiveness के विषय में मेरी सोच निश्चित रूप से बेहतर हुई है.उम्मीद है इस article को पढने के बाद Forgiveness को लेकर आपके नज़रिए में भी एक बेहतर बदलाव आएगा.


ज़रा सा माफ़ कीजिये .......

'Be a human' ये phrase आपने अपनी life में कितनी बार सुना होगा और बोला होगा, पर इसके गहरे अर्थ को समझने की कोशिश हम कितनी बार करते हैं. 'Respect begets respect' and 'love begets love' यानि 'respect के बदले में respect और love के बदले में love 'क्या हमेशा ऐसा ही हो ये ज़रूरी है? याद कीजिये अपने जीवन का कोई ऐसा पल जब आपने बिना ये सोचे किसी की मदद की हो कि बदले में मुझे क्या मिलेगा या इसकी मुझे क्या कीमत चुकानी पड़ेगी. ईश्वर ने इंसान को बहुत सारी अच्छाइयों और positive qualities से सजाया है.  उन अच्छाइयों में एक अच्छाई है परोपकारी व्यवहार या altruistic behaviour.  ये एक unselfish concern है दूसरों की सहायता करने का. हम अपनी life  में लोगों की मदद कई बार करते हैं पर सोचने वाली बात ये है कि ये मदद कितनी बार बदले में कुछ न पाने की  भावना से प्रेरित होती  है.  न चाहते हुए भी कहीं न कहीं हमारे मन में एक expectation या उम्मीद जन्म ले लेती है कि हमे भी इस उपकार  के बदले में ज़रूर कुछ मिलेगा, कुछ नहीं तो बदले में एक thank  you की  उम्मीद तो हो ही जाती है.  
 
 तो ऐसा कौन सा उपकार है जो इस तरह  की उम्मीद या भावना से परे है? ऐसा कौन सा उपकार है जो दूसरों के लिए तो अनमोल है पर मदद देने वाले के लिए बहुत ही आसान और सस्ता.  वो  उपकार है किसी को किसी की ग़लती के लिए क्षमा करना...forgive करना. किसी को किसी की भूल के लिए क्षमा करना और आत्म ग्लानि से मुक्ति दिलाना एक बहुत बड़ा परोपकार है.  क्षमा  करने की  प्रक्रिया में क्षमा करने वाला क्षमा पाने वाले से कहीं अधिक सुख पाता  है.  अगर सोचा जाये तो छोटी से छोटी या बड़ी से बड़ी ग़लती को कभी भी past में जा कर संवारा नहीं जा सकता , उसके लिए क्षमा से अधिक कुछ नहीं माँगा जा सकता है.  अगर आप किसी की भूल को माफ़ करते हैं  तो उस व्यक्ति की  सहायता तो करते ही हैं साथ ही साथ स्वयं की सहायता भी करते हैं.  क्षमा  करने  के  लिए व्यक्ति को अपनी ego  से ऊपर उठ कर सोचना पड़ता है जो कि एक कठिन काम  है और  सिर्फ एक सहनशील व्यक्ति ही इसे कर सकता है.  कभी आपने इस बात पर ध्यान दिया है कि अपनी रोज़ की ज़िन्दगी में हम कितनो को क्षमा करते हैं और कितनो से क्षमा पाते  हैं. कितना आसान है किसी से एक शब्द sorry कह कर आगे निकल जाना और बदले में अपने आप ही ये सोच लेना कि उस व्यक्ति ने हमे माफ़ भी कर दिया होगा.  क्या होता अगर हमारे माता- पिता हमारी भूलों के लिए हमें क्षमा नहीं करते? क्या हो अगर ईश्वर  हमें  हमारे अपराधों के लिए क्षमा करना छोड़ दे . इसलिए अगर हम किसी को क्षमा नहीं कर सकते तो हम  ईश्वर से अपने लिए माफ़ी की उम्मीद कैसे कर सकते हैं.   किसी महान व्यक्ति ने कहा है कि  किसी को किसी की भूल के लिए माफ़ ना करना बिल्कुल ऐसा ही है जैसे ज़हर खुद पीना  और उम्मीद करना कि उसका असर दूसरे पर हो.  सोचिये कि अगर क्षमा नाम का परोपकार इस दुनिया में ना हो तो  कोई किसी से कभी प्रेम ही नहीं कर पायेगा...love is nothing without forgiveness and forgiveness is nothing without love.

कोई भी परोपकार करने के लिए जो सबसे पहली और आवश्यक चीज़ आपके पास होनी चाहिए वो है आपकी ख़ुशी.  हर इन्सान को किसी भी काम को करने से पहले अपनी ख़ुशी पहले देखनी चाहिए.  सुनने में थोड़ा अजीब लगता है न कि अपनी ख़ुशी पहले कैसे रखें जबकि हमेशा  से ये ही सीखते आये हैं  कि अपनी ख़ुशी का sacrifice  करके भी दूसरों की ख़ुशी पहले देखनी चाहिए.  सवाल ये भी उठता है कि अगर अपनी ख़ुशी पहले देखेंगे  तो परोपकार कैसे करेंगे? दोनों एक दूसरे के बिल्कुल opposite हैं.  तो उत्तर ये है कि अगर आप किसी की  मदद बाहरी  प्रेरणा या extrinsic motivation की  वजह से कर रहे हैं तो वो परोपकार है ही नहींपरोपकार तो वो होता है जिसका स्रोत आंतरिक प्रेरणा या intrinsic motivation होता है.  शायद आप ये नहीं जानते कि आप दूसरों को ख़ुशी तब ही दे पाएंगे जब आप स्वयं खुश होंगे.  Sacrifice करना एक अच्छी बात है लेकिन वहीँ जहाँ sacrifice करने से आपको ख़ुशी मिल रही हो.  अगर कोई अपनी ख़ुशी को बार- बार मार कर sacrifice करता है तो एक दिन वो frustration का रूप ले लेता है जिसके negative effects भी हो सकते हैं.  ये human  nature है कि अगर हम अपने जीवन से परेशान या दुखी हैं तो दूसरों के खुशहाल जीवन को देख कर हम सच्चे मन  से उसे कभी appreciate  नहीं कर सकते. एक हारा हुआ इंसान कभी भी किसी जीतने वाले इंसान को सच्चे मन से बधाई नहीं दे पाता इसके पीछे उसकी कोई दुर्भावना नहीं होती बल्कि अपनी ही आत्मग्लानि होती है. इसलिए किसी का भी कल्याण करने की पहली सीढ़ी है अपने मन की ख़ुशी और संतुष्टि  और क्षमा करने की प्रक्रिया में भी यही  नियम लागू होता है. एक प्रसन्न रहने वाला व्यक्ति दूसरों को अधिक देर तक अप्रसन्न नहीं देख सकता. ऐसा कहा जाता है कि जिसके पास जो होता है वही वो दूसरों को देता है. जो वस्तु आप के पास उपलब्ध ही नहीं वो आप किसी को कैसे  दे सकते है? आम के पेड़ से हमेशा आम ही प्राप्त करने की उम्मीद की जा सकती है किसी और फल की नहीं.  ये याद रखिये कि अगर आप अन्दर से positive हैं  और खुश हैं तो अपने आस- पास भी positivity ही फैलायेंगे.  "idiots neither forgive nor forget, naive forgets but not forgive but a kind person forgives but never forgets."  " मूर्ख व्यक्ति ना क्षमा करते हैं न भूलते हैं , अनुभवहीन व्यक्ति भूल जाते हैं ,पर क्षमा नहीं करते , लेकिन एक दयालु व्यक्ति क्षमा कर देता है पर भूलता नहीं."
  
इसलिए अगर अपनी रोज़ की ज़िन्दगी में आप लोगों  को क्षमा करते हैं तो ये आप  का अनजाने  में उनपर  किया  गया   सबसे  बड़ा  उपकार  होता  है  जिसकी  आपको  कुछ  भी  कीमत  नहीं चुकानी  पड़ती .........
कहा भी गया  है -
'to err is a human but to forgive is a divine'  

माफ़ करना अँधेरे कमरे  में रौशनी करने जैसा होता है,  जिसकी रौशनी में माफ़ी मांगने वाला और माफ़ करने वाला दोनों एक दूसरे को और करीब से जान पाते हैं. माफ़ करके आप किसी को एक मौका देते हैं अपनी अच्छाइयों को साबित करने का. सोचिये कि अगर द्रौपदी ने अपने अपमान के लिए दुर्र्योधन को  क्षमा कर दिया होता तो शायद  महाभारत के उस युद्ध में इतना नरसंहार  हुआ होता. क्यों कहा जाता है कि मरने वाले को हमेशा क्षमा कर देना चाहिए ? क्या सचमुच इसलिए कि उस इंसान को फिर कभी माफ़ी मांगने का मौका नहीं मिलेगा या इसलिए कि आपको फिर उसे  कभी माफ़ करने का मौका न मिले?

तो अगर हम किसी ज़िन्दगी की सूखी ज़मीन पर माफ़ी की दो- चार बूंदों की बारिश कर पायें  तो हो सकता है कि उस  सूखी ज़मीन पर आशाओंऔर मुस्कुराहटों के फूल खिल उठें.

तो ज़िन्दगी में रुठिये, मनाइए, शिकवे और मोहब्बत भी कीजिये पर सुनिए!!!!!!! 'ज़रा सा माफ़ भी कीजिये'  


We are grateful to Mrs.Shikha Mishra for sharing this good quality and  thoughtful HINDI article on Forgiveness with AchchiKhabar.Com. Thanks a lot !

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निवेदन : कृपया अपने comments के through बताएं की ये Forgiveness पे ये Hindi Article  आपको कैसी लगा .

यदि आपके पास English या Hindi में कोई good news; inspirational story या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी Id है:achchikhabar@gmail.com.पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!


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Tuesday, 11 January 2011

करोड़पति बनना है तो नौकरी छोडिये.......


करोड़पति बनना है तो नौकरी छोडिये....... 

चलिए, पहले एक छोटी से exercise करते हैं. आप अपने शहर के किन्ही पांच करोड़पतियों की list मन में सोचिये.....please इस step को miss मत कीजिये , सोचिये ज़रूर !!!  

अब बताइये इस लिस्ट में क्या कोई ऐसा भी है जो नौकरी पेशा है? मेरी लिस्ट में तो नहीं है,मेरे दिमाग में जो नाम आये वो मै आपको बताना चाहूँगा. मैं Gorakhpur  का रहने वाला हूँ और ये लोग वहीँ के हैं:
  • चेतना मसाले वाले Uncle,
  •  डॉ. अग्रवाल, जिनका खुद का Hospital है
  • Mr. Jalan-  सरिया वाले
  • मेरेcolony के एक uncle जिनके Engineering College चलते हैं , और
  • बरनवाल Uncle , जिनके यहाँ से हम लोग Jewelery  खरीदते हैं.
इन सभी में एक बात common   है. लोग इनके यहाँ नौकरी करते हैं पर ये किसी के यहाँ नौकरी नहीं करते.ये सभी उद्यमी हैं, Entrepreneurs हैं, Businessmen  हैं पर employee  नहीं हैं. 
 
मैंने कुछ दोस्तों से भी ये प्रश्न किया उनकी सूची में भी किसी नौकरी करने वाले का नाम नहीं था. अब ये बात और है की आप दिमाग पे जोर डालेंगे तो कुछ ऐसे लोग मिल जायेंगे पर इनमे से ज्यादातर के बाल या तो सफ़ेद हो चुके होंगे या फिर पूरी फसल ही साफ़ हो चुकी होगी.अगर बाल सफ़ेद करा कर Crorepati बनाना है तो नौकरी  बुरी नहीं है..तीन-चार  promotion  और  15- 20 साल  में Crorepati बन ही जायेंगे... पर ऐसे बने तो बच्चों के लिए बनेंगे अपने लिए नहीं...और मज़ा तो अपने लिए बनने में है....क्यों? और अगर अपने लिए Crorepati बनना है तो खुद बनना होगा एक Entrepreneur.


यहाँ एक बात कहना चाहूँगा कुछ लोग ज्यादा पैसा कमाने कि इच्छा रखने वालों को उतनी  respect  से नहीं देखते हैं, पर मुझे लगता  है कि इस मंहगाई को देखकर उनके विचार में भी बदलाव आ चुका होगा....कितना कमाना  ज्यादा कमाना है इसकी परिभाषा बड़ी तेजी से बदल रही है...मेरी नज़र मैं ज्यादा पैसे कमाने कि इच्छा रखना एक अच्छी बात है..  बशर्ते उसे कमाने के लिए गलत काम न किये जाएँ. और शायद इस article  को भी वही लोग पढ़ रहे होंगे जो ऐसी इच्छा रखते होंगे वरना article  का title  पढ़ने के बाद ही वो किसी और topic  पर चले गए होते.चलिए अब आते हैं main मुद्दे पर :


पर नौकरी छोडें कैसे???


सवाल बिलकुल ठीक है. पर उससे भी बड़ा एक सवाल है:, नौकरी छोड़ी तो करेंगे क्या ? अगर आपके मन में ये दूसरा सवाल आ रहा है तो उसका मेरे पास कोई जवाब नहीं है. क्योंकि ये तो आपके अंदर से आने वाली  आवाजा है कि आप क्या करना चाहते हैं . और यदि यह नहीं आ रही है तो अभी आप इस तरह के  step  के लिए बिलकुल तैयार नहीं हैं...पर ये बात पक्की है कि यदि आप चाहें तो समय के साथ खुद को तैयार कर सकते हैं.


पर यदि आप उनमे से हैं जिनका कोई सपना है ,जो कुछ बड़ा, कुछ महान , कुछ अपना  करना चाहते हैं तो आपको पहले प्रश्न के बारे में सोचना ही होगा. क्योंकि अगर आप अभी नहीं सोचेंगे तो आगे आपके लिए ये सोचना और भी मुश्किल हो सकता है:भविष्य में
  • आपकी जिम्मेदारियां बढ़  जायेंगी यानी आपकी risk  लेने की क्षमता घट जायेगी.
  • हो सकता ही आपकी  salary  बढ़ जाए और आप खुद को समझा लें. कि चल भाई पैसे आ तो रहे हैं...अब और क्या चाहिए.
कुछ लोग सोच सकते हैं कि lecture देना आसान है पर करना बहुत मुश्किल है. बात सच है ,पर ये भी सच है कि ये करना मुश्किल ज़रूर है पर असंभव नहीं. 

अगर Dheerubhai Ambani ने petrol pump की नौकरी नहीं छोड़ी होती तो क्या आज  Reliance  जैसी company होती? अगर Narayan Murthy ने Patni Computers की अपनी नौकरी नहीं छोड़ी होती तो क्या आज Infosys का कोई वजूद होता?Amitabh Bachchan  ने भी पहले  Shaw Wallace और बाद में Bird & Co, नमक एक  shipping firm में काम किया, अगर उन्होंने भी अपने दिल कि आवाज़ नहीं सुनी होती तो भला भारत को कहाँ मिलता इतना बड़ा महानायक?

ये बहुत बड़े-बड़े उदाहरण हैं, जिन्हें हम सब जानते हैं पर यकीन जानिए कि ऐसी हजारों success stories  हैं, जहाँ पर लोगों ने अपनी सोच को हकीकत में बदल कर दिखाया है...गांव की गलियों से निकल कर शहर की बुलंदियों को अपना बनया है. खुद बने हैं Crorepati और कईयों को लखपति बनाया है.  

पर अभी भी हमारा जो पहला सवाल था कि पर नौकरी छोडें कैसे?? वो वहीँ का वहीँ बना हुआ है. कहने की बात नहीं है कि ये एक एक बहुत ही बड़ा step  है, और बस यूँहीं नहीं लिया जा सकता है. इस क्रांतिकारी कदम को वही उठा सकता है जिसके मन में कुछ अपना करने की तीव्र इच्छा हो और वो अपने plan  को execute करने के लिए बहुत ज्यादा passionate हो. जिनके अंदर वाकई में कुछ कर गुजरने की दीवानगी होती है, वो इधर-उधर की बातें ज्यादा नहीं सोचते और बस लग जाते हैं अपने प्रयासों में. 

पर हम मे से ज्यादातर लोग (including me) कुछ करना तो चाहते हैं, पर हमारे अंदर एक डर सा लगा होता है कि कहीं हम fail  हो गए तो जो है वो भी चला जायेगा. ये डर वाजिब भी है. इसीलिए मेरी समझ से एक बीच का रास्ता निकालना अच्छा साबित हो सकता है , जैसे कि कोई Side-Business शुरू कर के. ये एक पुराना अजमाया हुआ तरीका है, जो आपने अपने आस-पास देखा भी होगा. Office timing के बाद और छुट्टी के दिनों में लोग अपने साइडी-बिजनेस को करते हैं और जब धीरे-धीरे बिजनेस ट्रैक पर आ जाता है तो अपनी नौकरी छोड़ कर पूरा समय business  में लगाते हैं. एक छोटा सा उदहारण देना चाहूँगा जो मैंने Rashmi Bansal जी की Connect The Dots book में पढ़ा था. 

N Mahadevan के अंदर एक Hotelier बनने की चाहत थी पर भाग्य ने उन्हें एक Professor  बना दिया था, पर उन्होंने ने भाग्य के इस फैसले को चुनौती दी और Madras University  में अपनी Professor कि prestigiuos job  छोड़ कर उन्होंने multi-million dollar Food Empire खड़ा कर दिया. 

सुबह 9 बजे से शाम को 4:30 बजे तक पढाने के बाद इन्होने काम समझने के लिए एक और  जॉब पकड़ ली, वो रोजाना शाम 6 से रात 12 बजे तक एक hotel में duty  करने लगे .जब काम समझ आ गया और कुछ पैसे इकठ्ठा हो गए तो उन्होंने खुद का एक Chinese resturant शुरू कर दिया.आज उनके restaurants 16 देशों में हैं ,जिनमे कुल 3000 employee  काम करते हैं. इन्होने खुद तो MBA  नहीं किया है पर IIM-Ahmedabad से pass-out बंदे को busineess सँभालने के लिए रखा हुआ है.

मेरा plan :

शायद आप जानते होंगे कि मैं भी अभी job कर रहा हूँ, और मैंने भी अपने लिए एक रास्ता चुना है, जो मैं आपको बताना चाहूँगा, हो सकता है आपके लिए भी इसमें से कुछ idea  निकल आये.

मेरा idea , दर-असल मेरा और मेरी wife Padmaja  का idea है . शादी से पहले वो job करती थी, पर हमने decide किया कि शादी के बाद  husaband और wife दोनों का  job करना एक बेवकूफी  है. क्योंकि ऐसा करके हम हर महीने अपनी income में 10-20 हज़ार रुपये extra तो जोड़ सकते हैं पर Crorepati नहीं बन सकते. इसलिए उसने job  छोड़ दी.अब आगे कुछ करना था.  

चूँकि शुरू  से ही उसका मन beauty related  चीजों में ज्यादा लगता था इसलिए हमने decide  किया कि हम अपने home-town Gorakhpur  में एक बहुत ही standard beauty parlour खोलेंगे, और धीरे-धीरे इसकी branches आस-पास और UP  के अन्य शहरों में खोलेंगे. वो parlour कि अंदरूनी चीजों का ध्यान रखेगी और मैं promotional activities और expansion के लिए काम करूँगा .खुशी की बात ये है कि हमने इस प्लान को  execute करने की शुरुआत भी कर दी  है.पहला step  इस business को करीब से समझने का था , इसीलिए फिलहाल Padmaja  VLCC से Beauty से related एक formal certification course  कर रही है और part time एक जान-पहचान के parlour में practice करके अपनी skills  को और भी निखार रही है. इसके बाद कुछ चीजें और करनी होंगी और हमारा plan implement हो जायेगा. अब इसमें हमें सफलता मिलेगी या नहीं ये हम नहीं जानते...पर अगर हमने try भी नहीं किया तो ये बिना match  खेले ही हार मान लेना होगा. और हमें तो जीतना है.

मेरे कुछ दोस्तों ने भी ऐसा ही कुछ किया है, मेरे friend Vaibhav Srivastava ने job करते हुए एक tution center की franchisee ली है और कुछ partners की मदद से उसे profitable  बनाने में लगा हुआ है. मेरे एक अन्य मित्र Rahul Sahay ने भी Reliance Life Insurance में काम करते हुए कुछ दोस्तों साथ मिलकर एक Vocational Training Centre, NIPS और एक शानदार restautrant खोल लिया है.

बहुत सारे लोग बहुत सारी ideas के साथ अपने-अपने सपनो को साकार करने में लगे हुए है, और कर रहे हैं,हम इंसानों में यही तो खास बात है ,हम जो सपने देखते हैं उन्हें साकार भी कर सकते हैं.

अंत में यही कहना चाहूँगा कि कोई risk ना लेना ही जिंदगी का सबसे बड़ा risk हैऔर ये risk  आप नहीं उठा सकते इसलिए अपने दिल की आवाज़ सुनिए और अपने सपनो को साकार कीजिये.All the best !                
Updated on 21-07-11

Padmaja  ने अपना course (Diploma in Cosmetology) complete  कर लिया है. और सबसे बड़ी बात है कि उन्हें VLCC,  में बतौर Beautician job  भी मिल गयी है :). यानी हम अपने plan  के मुताबिक बिलकुल सही जा रहे हैं.
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Sunday, 2 January 2011

कैसे निभाएं New Year Resolution को ?



 कैसे निभाएं New  Year Resolution को ?

अगर आप भी उन करोड़ों लोगों में से हैं जो नए साल पे कोई resolution, promise या प्रण   तो करते हैं पर उसे निभा नहीं पाते हैं तो ये  article  आपकी मदद कर सकता है. 

पहली चीज,  आखिर लोग new year resolution लेते क्यों हैं ? शायद खुद में कोई positive बदलाव लाने के लिए, कोई अच्छी आदत डालने के लिए .क्या आपने कभी सुना है कि किसी ने ये resolution लिया हो कि कल से मैं 10 cigarette  और पियूँगा? नहीं सुना होगा ,पर ये ज़रूर सुना होगा कि कल से मुझे cigarette पीना छोड़ना है. यानि new year resolution  का मकसद तो बड़ा नेक होता है. पर सवाल ये उठता है कि आखिर इसे निभाना इतना मुश्किल क्यों होता है?क्यों ज्यादातर लोग अपने resolution  को महीने भर भी नहीं चला पाते हैं ? आज इस article के माध्यम से मैं आपके साथ New Year Resolution कैसे निभाएं? पर अपने thoughts share करूँगा :

कभी भी हो सकती है आपके resolution कि शुरुआत 

New Year Resolution कि शुरुआत 1 जनवरी  से ही हो ये ज़रूरी नहीं है. इसलिए  यदि आपने अभी तक कोई resolution न भी लिया हो तो कोई बात नहीं. और यदि आपने साल के शुरू में कोई resolution लिया था और वो एक दिन भी नहीं चल पाया तो भी कोई बात नहीं. जैसे हम पूरे महीने Happy New Year wish  करते रहते हैं उसी तरह हम पूरे महीने कभी भी new year resolution   ले सकते हैं. और यदि resolution लेते लेते पूरी जनवरी निकल जाये तो आप आगे भी resolution  तो ले ही सकते हैं भले ही उसे new year resolution  न कह के simply  resolution  कहिये. 

Resolve तभी करें जब सच-मुच आप इसकी ज़रूरत मह्शूश करें

अगर 31st December  को आपके मन में आता है की मुझे कल से office time से पहुचना है या मुझे कल से सुबह walk  पे जाना है और आप ये resolution  ले लेते हैं तो बहुत ज्यादा   chance  है की आपके इस प्रण के प्राण 24 घंटे के अंदर ही निकल जायेंगे.   क्योंकि ये resolution  बिना ज्यादा सोचे-समझे अचानक ही ले लिया गया है.

अब ये कैसे पता चलेगा कि सच-मुच कौन सा resolution लेने की ज़रूरत है? इसका कोई tried and tested तरीका तो नहीं है पर मैं आपसे वो तरीका share करना चाहूँगा जो मेरे लिए काम करता है.
मुझे जो बाते अपील करती हैं उन्हें मैं पहले एक diary में लिख लेता हूँ.( कभी किसी loose page  पे न लिखें उसके गायब होने में कुछ ही घंटे लगेंगे). अब मैं उन्हें  priority wise list  कर लेता हूँ. और सबसे पहली priority उसी की  होती है जो काम मुझे सबसे ज्यादा खुशी दे. अब मैं उस point को ले के काफी सोचता हूँ और visualize करता हूँ कि ये हो जाने पे कितना मज़ा आएगा ...कितना अच्छा  feel  होगा....सच मानिए मैं उसके बारे में इतना ज्यादा सोचता हूँ कि वो काम शुरू हो जाता है. चाहे वो Kartavya (An NGO) की शुरुआत करना हो  या फिर AchchiKhabar.Com  को start  करना हो..काम होता ज़रूर है. सोच बड़ी चीज है.
 
तो यदि आपको कोई नयी आदत डालनी या छोड़नी है तो पहले उसके बारे में खूब सोचें.उसको हकीकत बनते सोचें उससे होने वाले फायेदे , मिलने वाली खुशी को सोचें; और अगर वाकई में आप इसको लेकर excited  feel   करते हैं तो फिर ले लें अपना  Resolution.   नहीं तो आगे बढ़ जाएँ..कोई ज़रूरी थोड़ी है की resolution लिया ही जाये.

अगर इतना सब कुछ करने के बाद आपने resolution लिया है तो यकीन जानिये  आप  already  उन 90%  लोगों कि  category  से निकल चुके हैं जो अपने  resolution  को 10 दिन भी नहीं रख पाते हैं. अब बात आती है कि कैसे इस  resolution  को बनाये रखा जाये.

अपने लक्ष्य को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटें

आप इस बात से तो agree  करेंगे ही कि किसी बड़े काम को अगर छोटे-छोटे कई कामों में  divide  कर दिया जाये तो उसे करना आसान हो जाता है. 

Student life  में मैं  अक्सर पढ़ने के लिए बड़े ही डिजाईनदार  Time-Table  बनाया करता था.....चाहे जो हो जाये कल से रोज 10  घंटे पढ़ना है....इतने बजे से इतने बजे तक Maths, इतने बजे से इतने बजे तक Chemistry, and so on,  पर दो दिन के अंदर उस Time Table का हवाई-जहाज बन जाता था और एक brand new time-table उसकी जगह ले लेता था..पर अफ़सोस इस वाले की भी नाव बन जाती थी. पर जब मैं infinite time की  जगह हफ्ते-हफ्ते भर का time-table बनाने लगा तो मुझे उसे follow करना आसान हो गया. 
   
कुछ ऐसी ही trick अपने  resolution  के साथ की जा सकती है. आप अपना resolution इस प्रण के साथ मत शुरू कीजिये कि मैं आज के बाद हमेशा  time से  office  पहुंचूंगा बल्कि  आप कुछ यूँ शुरू कीजिये कि आज के बाद मैं लगातार 21  दिनों तक office time  से पहुंचूंगा. सिर्फ  21  दिनों तक उसके बाद जो होगा देखा जायेगा.  ऐसा करने से आपको ये resolution पहाड नहीं लगेगा और आपका अवचेतन मस्तिष्क इस बात को कहीं आसानी से  accept कर लेगा कि ये  काम doable  है. 

अगर आप सोच रहे हैं कि 21  दिन ही क्यों , तो बता दें कि  Researchers  का मानना है कि यदि आपकी किसी काम को अपनी  habit  बनानी है तो कम से कम उसे 21 दिन करना चाहिए , और यदि आप उसे अपनी  personality  का हिस्सा बनाना चाहते हैं तो 6  महीने तक उसे करें.

  
21 दिन बाद क्या होगा ? अगर आपने अपना काम सही ढंग से किया है तो अब तक ये आपकी habit में आ चुका होगा. और अब इसे जरी रखना कहीं आसान होगा.  और यदि ये आपकी habit में नहीं भी आया है तो भी आपने कुछ सफलता तो पायी ही होगी और ये आपको और अधिक सफलता कि तरफ प्रेरित करेगी, success breeds success.  एक  छोटा लक्ष्य  achieve करना आपके confidence  को बढ़ा देगा , अब आप अपना अगला goal  चुन  सकते हैं जैसे कि अगले 42 दिन तक  resolution  निभाने का लक्ष्य. और इस तरह से आप सच-मुच अपने resolution को निभा सकते हैं.

कुछ और Tips  जो मददगार हो सकती हैं :

  • अपने resolution को बड़े बड़े अक्षरों में लिख कर अपने सामने रखें. For Example, “For next 21 days   मुझे सुबह Exercise करना है 
  • अपने resolution को कुछ खास लोगों को बताएँ,ऐसा करने पर आप खुद को थोडा answerable मह्शूश करेंगे. और resolution के follow  होने के chances  बढ़ जायेंगे.
  • खुद को माफ करना ज़रूरी है , यदि एक-आध बार आप अपने resolution से विचलित हो जाएँ तो उसे अपनी हार न माने बल्कि आगे और भी दृढ़ता से उसे निभाने का प्रयास करें.

और अंत में मैं आप सभी को अपनी तरफ से नव वर्ष कि शुभकामनाएं देता हूँ. उम्मीद करता हूँ कि यदि आपने कोई  new year resolution  लिया होगा या लेंगे  तो उसे कामयाबी के साथ निभा भी पायंगे. All the best.

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