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7 Habits जो बना सकती हैं आपको Super Successful

AchchiKhabar.Com: 7 Habits जो बना सकती हैं आपको Super Successful

Sunday 31 July 2011

7 Habits जो बना सकती हैं आपको Super Successful



The 7 Habits of Highly Effective People
The 7 Habits of Highly Effective People in Hindi

7 Habits of Highly Effective People, या अतिप्रभावकारी लोगों की 7 आदतें, Stephen R. Covey द्वारा लिखी गयी ये किताब आपने ज़रूर देखी, पढ़ी, या सुनी होगी. आज AchchiKhabar.Com पर मैं आपको इसी best seller book का सार Hindi में share कर रहा हूँ. यह पढकर यदि आपको लगता है कि वाकई करोड़ों लोगों की तरह आप भी इससे लाभान्वित हो सकते हैं तो बिना किसी झिझक के इस book को ज़रूर खरीदें. यह book Hindi में भी उपलब्ध है.


 यह Post थोड़ी लंबी  है. लगभग 2750 शब्दों की, इसलिए यदि आप चाहें तो AchchiKhabar.Com को Bookmark या Favourites में list कर लें . ताकि यदि आप एक बार में पूरी post  न पढ़ पायें तो आसानी से फिर इस पेज पर आ सकें. वैसे Google में AchchiKhabar.Com search  करने पर भी आप दुबारा इस Page  पर आ सकते हैं.


7 Habits जो बना सकती हैं आपको Super Successful

आपकी ज़िन्दगी बस यूँ ही नहीं घट जाती. चाहे आप जानते हों या नहीं , ये आप ही के द्वारा डिजाईन की जाती है. आखिरकार आप ही अपने विकल्प चुनते हैं.आप खुशियाँ चुनते हैं . आप दुःख चुनते हैं.आप निश्चितता चुनते हैं. आप अपनी अनिश्चितता चुनते हैं.आप अपनी सफलता चुनते हैं. आप अपनी असफलता चुनते हैं.आप साहस चुनते हैं.आप डर चुनते हैं.इतना याद रखिये कि हर एक क्षण, हर एक परिस्थिति आपको एक नया विकल्प देती है.और ऐसे में आपके पास हमेशा ये opportunity होती है कि आप चीजों को अलग तेरीके से करें और अपने लिए और positive result produce  करें.

Habit 1 : Be Proactive /
प्रोएक्टिव बनिए
 
Proactive  होने का मतलब है कि अपनी life के लिए खुद ज़िम्मेदार बनना. आप हर चीज के लिए अपने parents  या  grandparents  को नही blame कर सकते . Proactive  लोग इस बात को समझते हैं कि वो "response-able" हैं . वो अपने आचरण के लिए जेनेटिक्स , परिस्थितियों, या परिवेष को दोष नहीं देते हैं.उन्हें पता होता है कि वो अपना व्यवहार खुद चुनते हैं. वहीँ दूसरी तरफ जो लोग reactive  होते हैं वो ज्यादातर अपने भौतिक वातावरण से प्रभावित होते हैं. वो अपने behaviour  के लिए बाहरी चीजों को दोष देते हैं. अगर मौसम अच्छा है, तो उन्हें अच्छा लगता है.और अगर नहीं है तो यह उनके attitude और  performance  को प्रभावित करता है, और वो मौसम को दोष देते हैं. सभी बाहरी ताकतें एक उत्तेजना  की तरह काम करती हैं , जिनपर हम react करते हैं. इसी उत्तेजना और आप उसपर जो प्रतिक्रिया करते हैं के बीच में आपकी सबसे बड़ी ताकत छिपी होती है- और वो होती है इस बात कि स्वतंत्रता कि आप  अपनी प्रतिक्रिया का चयन स्वयम कर सकते हैं. एक बेहद महत्त्वपूर्ण चीज होती है कि आप इस बात का चुनाव कर सकतेहैं कि आप क्या बोलते हैं.आप जो भाषा प्रयोग करते हैं वो इस बात को indicate  करती है कि आप खुद को कैसे देखते हैं.एक proactive व्यक्ति proactive भाषा का प्रयोग करता है.-- मैं कर सकता हूँ, मैं करूँगा, etc. एक reactive  व्यक्ति reactive  भाषा का प्रयोग करता है- मैं नहीं कर सकता, काश अगर ऐसा होता , etc. Reactive  लोग  सोचते हैं कि वो जो कहते और करते हैं उसके लिए वो खुद जिम्मेदार नहीं हैं-उनके पास कोई विकल्प नहीं है.

ऐसी परिस्थितियां जिन पर बिलकुल भी नहीं या थोड़ा-बहुत control किया जा सकता है , उसपर react या चिंता करने के बजाये proactive  लोग अपना time  और  energy  ऐसी चीजों में लगाते हैं जिनको वो  control  कर सकें. हमारे सामने जो भी समस्याएं ,चुनतिया या अवसर होते हैं उन्हें हम दो क्षेत्रों में बाँट सकते हैं:

1)Circle of Concern (
चिंता का क्षेत्र )

2)Circle of Influence. (
प्रभाव का क्षेत्र )

Proactive 
लोग अपना प्रयत्न Circle of Influence पर केन्द्रित करते हैं.वो ऐसी चीजों पर काम करते हैं जिनके बारे में वो कुछ कर सकते हैं: स्वास्थ्य , बच्चे , कार्य क्षेत्र कि समस्याएं. Reactive  लोग अपना प्रयत्न Circle of Concern पर केन्द्रित करते हैं: देश पर ऋण , आतंकवाद, मौसम. इस बात कि जानकारी होना कि हम अपनी energy किन चीजों में खर्च करते हैं, Proactive  बनने की दिशा में एक बड़ा कदम है

Habit 2: Begin with the End in Mind  अंत को ध्यान में रख कर शुरुआत करें.
 
तो , आप बड़े होकर क्या बनना चाहते हैं? शायद यह सवाल थोड़ा अटपटा लगे,लेकिन आप इसके बारे में एक क्षण के लिए सोचिये. क्या आप अभी वो हैं जो आप बनना चाहते थे, जिसका सपना आपने देखा था, क्या आप वो कर रहे हैं जो आप हमेशा से करना चाहते थे. इमानदारी से सोचिये. कई बार ऐसा होता है कि लोग खुद को ऐसी जीत हांसिल करते हुए देखते हैं जो दरअसल खोखली होती हैं--ऐसी सफलता, जिसके बदले में उससे कहीं बड़ी चीजों को  गवाना पड़ा. यदि आपकी सीढ़ी सही दीवाल पर नहीं लगी है तो आप जो भी कदम उठाते हैं वो आपको गलत जगह पर लेकर जाता है.
Habit 2  आपके imagination या  कल्पना  पर आधारित है-- imagination , यानि आपकी वो क्षमता जो आपको अपने दिमाग में उन चीजों को दिखा सके जो आप अभी अपनी आँखों से नहीं देख सकते. यह इस सिधांत पर आधारित है कि हर एक चीज का निर्माण दो बार होता है. पहला mental creation,और दूसरा physical creation. जिस  तरह blue-print तैयार होने के बाद मकान बनता है , उसी प्रकार mental  creation  होने के बाद ही physical creation होती है.अगर आप खुद  visualize  नहीं करते हैं कि आप क्या हैं और क्या बनना चाहते हैं तो आप, आपकी life कैसी होगी इस बात का फैसला औरों पर और परिस्थितियों पर छोड़ देते हैं. Habit 2  इस बारे में है कि आप किस तरह से अपनी विशेषता को पहचानते हैं,और फिर अपनी personal, moral और  ethical  guidelines के अन्दर खुद को खुश रख सकते और पूर्ण कर सकते हैं. अंत को ध्यान में रख कर आरम्भ करने का अर्थ है, हर दिन ,काम या project  की शुरआत एक clear vision  के साथ करना कि हमारी क्या दिशा और क्या मंजिल होनी चाहिए, और फिर proactively  उस काम को पूर्ण करने में लग जाना.

Habit 2  को practice में लाने का सबसे अच्छा तरीका है कि अपना खुद का एक Personal Mission Statement बनाना. इसका फोकस इस बात पर होगा कि आप क्या बनना चाहते हैं और क्या करना चाहते हैं.ये success के लिए की गयी आपकी planning है.ये इस बात की पुष्टि करता है कि आप कौन हैं,आपके goals को focus  में रखता है, और आपके ideas  को इस दुनिया में लाता है. आपका Mission Statement आपको अपनी ज़िन्दगी का leader बनाता है. आप अपना भाग्य खुद बनाते हैं, और जो सपने आपने देखे हैं उन्हें साकार करते हैं.

Habit 3 : Put First Things First प्राथमिक चीजों को वरीयता दें

एक
balanced life  जीने के लिए, आपको इस बात को समझना होगा कि आप इस ज़िन्दगी में हर एक चीज नहीं कर सकते.खुद को अपनी क्षमता से अधिक कामो में व्यस्त करने की ज़रुरत नहीं है. जब ज़रूरी हो तो "ना" कहने में मत हिचाकिये, और फिर अपनी important priorities पर focus  कीजिये.
Habit 1  कहती है कि , " आप in charge हैं .आप creator हैं". Proactive होना आपकी अपनी choice है. Habit 2 पहले दिमाग में चीजों को visualize  करने के बारे में है.अंत को ध्यान में रख कर शुरआत करना vision से सम्बंधित है. Habit 3  दूसरी creation , यानि  physical creation  के बारे में है. इस habit में Habit 1 और Habit 2  का समागम होता है. और यह हर समय हर क्षण होता है. यह Time Management  से related कई प्रश्नों को  deal  करता है.

लेकिन यह सिर्फ इतना ही नहीं है.
Habit 3  life management  के बारे में भी है---आपका purpose,values,roles ,और priorities. "प्राथमिक चीजें" क्या हैं? प्राथमिक चीजें वह हैं , जिसको आप व्यक्तिगत रूप से सबसे मूल्यवान मानते हों.यदि आप प्राथमिक कार्यों को तरजीह देने का मतलब है कि , आप अपना समय , अपनी उर्जा Habit 2  में अपने द्वारा set की गयीं priorities पर लगा रहे हैं.

Habit 4: Think Win-Win  हमेशा जीत के बारे में सोचें

Think Win-Win अच्छा होने के बारे में नहीं है, ना ही यह कोई short-cut है. यह character पर आधारित एक कोड है जो आपको बाकी लोगों से interact और सहयोग करने के लिए है.
 
हममे से ज्यादातर लोग अपना मुल्यांकन दूसरों से comparison और  competition  के आधार पर करते हैं.हम अपनी सफलता दूसरों की असफलता में देखते हैं---यानि अगर मैं जीता, तो तुम हारे, तुम जीते तो मैं हारा. इस तरह life एक zero-sum game बन जाती है. मानो एक ही रोटी हो , और अगर दूसरा बड़ा हिस्सा ले लेता है तो मुझे कम मिलेगा, और मेरी कोशिश होगी कि दूसरा अधिक ना पाए.हम सभी ये game  खेलते हैं, लेकिन आप ही सोचिये कि इसमें कितना मज़ा है?

Win -Win ज़िन्दगी को co-operation की तरह देखती है, competition की तरह नहीं. Win-Win दिल और दिमाग की ऐसी स्थिति है जो हमें लगातार सभी का हित सोचने के लिए प्रेरित करती है.Win-Win का अर्थ है ऐसे समझौते और समाधान जो सभी के लिए लाभप्रद और संतोषजनक हैं.इसमें सभी को रोटी खाने को मिलती है, और वो काफी अच्छा taste  करती है.

एक व्यक्ति या संगठन जो Win-Win attitude  के साथ समस्याओं को हल करने की कोशिश करता है उसके अन्दर तीन मुख्य बातें होती हैं:

1. Integrity /
वफादारी : अपने values, commitments और feelings के साथ समझौता ना करना.
2 . Maturity / परिपक्वता :  अपने ideas और feelings  को साहस के साथ दूसरों के सामने रखना और दूसरों के विचारों और भावनाओं की भी कद्र करना.
3. Abundance Mentality / प्रचुरता की मानसिकता : इस बात में यकीन रखना की सभी के लिए बहुत कुछ है.
बहुत लोग either/or  के terms  में सोचते हैं: या तो आप अच्छे हैं या आप सख्त हैं. Win-Win में दोनों की आवश्यकता होती है. यह साहस और सूझबूझ के बीच balance  करने जैसा है.Win-Win को अपनाने के लिए आपको सिर्फ सहानभूतिपूर्ण ही नहीं बल्कि आत्मविश्वाश से लबरेज़ भी होना होगा.आपको सिर्फ विचारशील और संवेदनशील ही नहीं बल्कि बहादुर भी होना होगा.ऐसा करना कि - courage और  consideration में balance  स्थापित हो, यही real maturity  है , और Win-Win  के लिए बेहद ज़रूरी है.

Habit 5: Seek First to Understand, Then to Be Understood / पहले दूसरों को समझो फिर अपनी बात समझाओ.
 
Communication  लाइफ की सबसे ज़रूरी skill  है. आप अपने कई साल पढना-लिखना और बोलना सीखने में लगा देते हैं. लेकिन सुनने का क्या है? आपको ऐसी कौन सी training  मिली है, जो आपको दूसरों को सुनना सीखाती है,ताकि आप सामने वाले को सच-मुच अच्छे से समझ सकें? शायद कोई नहीं? क्यों?

अगर आप ज्यादातर लोगों की तरह हैं तो शायद आप भी पहले खुद आपनी बात समझाना चाहते होंगे. और ऐसा करने में आप दुसरे व्यक्ति को पूरी तरह ignore कर देते होंगे , ऐसा दिखाते होंगे कि आप सुन रहे हैं,पर दरअसल आप बस शब्दों को सुनते हैं पर उनके असली मतलब को पूरी तरह से miss  कर जाते हैं.
 
 सोचिये ऐसा क्यों होता है? क्योंकि ज्यादातर लोग इस intention  के साथ सुनते हैं कि उन्हें reply  करना है, समझना नहीं है.आप अन्दर ही अन्दर खुद को सुनते हैं और तैयारी  करते हैं कि आपको आगे क्या कहना है,क्या सवाल पूछने हैं, etc. आप जो कुछ भी सुनते हैं वो आपके life-experiences  से छन कर आप तक पहुचता है.
 
 आप जो सुनते हैं उसे अपनी आत्मकथा से तुलना कर देखते हैं कि ये सही है या गलत. और इस वजह से आप दुसरे की बात ख़तम होने से पहले ही अपने मन में एक धारणा बना लेते हैं कि अगला क्या कहना चाहता है.  क्या ये वाक्य कुछ सुने-सुने से लगते है?

"
अरे, मुझे पता है कि तुम कैसा feel  कर रहे हो. मुझे भी ऐसा ही लगा था." "मेरे साथ भी भी ऐसा ही हुआ था." " मैं तुम्हे बताता हूँ कि ऐसे वक़्त में मैंने क्या किया था."

चूँकि आप अपने जीवन के अनुभवों के हिसाब से ही दूसरों को सुनते हैं , आप इन चारों में से किसी एक तरीके से ज़वाब देते हैं:


Evaluating/ मूल्यांकन:
पहले आप judge करते हैं उसके बाद सहमत या असहमत होते हैं.
Probing / जाँच :
आप अपने हिसाब से सवाल-जवाब करते हैं.
Advising/ सलाह :
आप सलाह देते हैं और उपाय सुझाते हैं.
Interpreting/ व्याख्या  :
आप दूसरों के मकसद और व्यवहार को अपने experience  के हिसाब से  analyze करते हैं.

शायद आप सोच रहे हों कि , अपने experience  के हिसाब से किसी से relate  करने में बुराई क्या है? कुछ situations  में ऐसा करना उचित हो सकत है, जैसे कि जब कोई आपसे आपके अनुभवों के आधार पर कुछ बताने के लिए कहे , जब आप दोनों के बीच एक trust  की relationship हो. पर हमेशा ऐसा करना उचित नहीं है.

Habit 6: Synergize / ताल-मेल बैठाना
 
सरल शब्दों में समझें तो , "दो दिमाग एक से बेहतर हैं " Synergize करने का अर्थ है रचनात्मक सहयोग देना. यह team-work है. यह  खुले दिमाग से पुरानी समस्याओं के नए निदान ढूँढना है.

पर ये युहीं बस अपने आप ही नहीं हो जाता. यह एक
process है , और उसी process से, लोग अपने experience  और expertise  को उपयोग में ला पाते हैं . अकेले की अपेक्षा वो एक साथ कहीं अच्छा result दे पाते हैं. Synergy  से हम एक साथ ऐसा बहुत कुछ खोज पाते हैं जो हमारे अकेले खोजने पर शायद ही कभी मिलता. ये वो  idea है जिसमे the whole is greater than the sum of the parts. One plus one equals three, or six, or sixty--या उससे भी ज्यादा.

जब लोग आपस में इमानदारी से
interact करने लगते हैं, और एक दुसरे से प्रभावित होने के लिए खुले होते हैं , तब उन्हें नयी जानकारीयाँ मिलना प्रारम्भ हो जाता है.आपस में मतभेद नए तरीकों के अविष्कार की क्षमता कई गुना बढ़ा देते हैं.
 

मतभेदों को महत्त्व देना synergy  का मूल है. क्या आप सच-मुच लोगों के बीच जो mental, emotional, और psychological differences  होते हैं, उन्हें महत्त्व देते हैं?या फिर आप ये चाहते  हैं कि सभी लोग आपकी बात मान जायें ताकि आप आसानी से आगे बढ़ सकें? कई लोग एकरूपता को एकता समझ लेते हैं. आपसी मतभेदों को weakness नहीं  strength  के रूप में देखना चाहिए. वो हमारे जीवन में उत्साह भरते हैं.

Habit 7: Sharpen the Saw
कुल्हाड़ी को तेज करें
 
Sharpen the Saw
का मतलब है अपने सबसे बड़ी सम्पत्ति यानि खुद को सुरक्षित रखना. इसका अर्थ है अपने लिए एक प्रोग्राम डिजाईन करना जो आपके जीवन के चार क्षेत्रों physical, social/emotional, mental, and spiritual में आपका नवीनीकरण करे. नीचे ऐसी कुछ activities के example दिए गए हैं:


Physical /  शारीरिक :
अच्छा खाना, व्यायाम करना, आराम करना
Social/Emotional /: सामजिक/भावनात्मक  :
औरों के ससाथ सामाजिक और अर्थपूर्ण सम्बन्ध बनाना.
Mental / मानसिक :
पढना-लिखना, सीखना , सीखना
Spiritual / आध्यात्मिक :
प्रकृति के साथ समय बीताना , ध्यान करना, सेवा करना.

आप जैसे -जैसे हर एक क्षेत्र में खुद को सुधारेंगे, आप अपने जीवन में प्रगति और बदलाव लायेंगे.Sharpen the Saw आपको fresh  रखता है ताकि आप बाकी की six habits अच्छे से practice  कर सकें. ऐसा करने से आप challenges face  करने की अपनी क्षमता को बढ़ा लेते हैं.बिना ऐसा किये आपका शरीर कमजोर पड़ जाता है , मस्तिष्क बुद्धिरहित हो जाता है,भावनाए ठंडी पड़ जाती हैं,स्वाभाव असंवेदनशील हो जाता है,और इंसान स्वार्थी हो जाता है. और यह एक अच्छी तस्वीर नहीं है, क्यों?
आप अच्छा feel  करें , ऐसा अपने आप नहीं होता. एक balanced life  जीने का अर्थ है खुद को renew  करने के लिए ज़रूरी वक़्त निकालना.ये सब आपके ऊपर है .आप खुद को आराम करके renew कर सकते हैं. या हर काम अत्यधिक करके खुद को जला सकते हैं . आप खुद को mentally और  spiritually प्यार कर सकते हैं , या फिर अपने well-being  से बेखबर यूँ ही अपनी ज़िन्दगी बिता सकते हैं. आप अपने अन्दर जीवंत उर्जा का अनुभव कर सकते हैं या फिर टाल-मटोल कर अच्छे स्वास्थ्य और व्यायाम के फायदों को खो सकते हैं
आप खुद को पुनर्जीवित कर सकते हैं और एक नए दिन का स्वागत शांति और सद्भाव के साथ कर सकते हैं.या फिर आप उदासी के साथ उठकर दिन को गुजरते देख सकते हैं. बस इतना याद रखिये कि हर दिन आपको खुद को renew करने का एक नया अवसर देता है, अवसर देता है खुद को recharge करने का. बस ज़रुरत है Desire (इच्छा),Knowledge( ज्ञान) और Skills(कौशल) की.


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Note: It was a summary of “The Seven Habits of Highly Effective People” in Hindi. Please read the complete book to benefit more.

Note: हिंदी में अनुवाद करने में  सावधानी बरतने के बावजूद कुछ त्रुटियाँ हो सकती हैं. कृपया क्षमा करें.
 
निवेदन : कृपया अपने comments के through बताएं की Stephen R Covey की लिखी book “The Seven Habits of Highly Effective People” की summary Hindi में आपको कैसी लगी.

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34 Comments:

At Sunday, July 31, 2011 , Blogger Chandan said...

Interesting and awesome post.

Thanks

 
At Sunday, July 31, 2011 , Anonymous Rakesh said...

Nice tips :)

 
At Monday, August 01, 2011 , Blogger Deepak Singh said...

I like this this post.

 
At Monday, August 01, 2011 , Blogger Jason Matthew said...

Nice Post.. Thanks for sharing with us :)

 
At Monday, August 01, 2011 , Blogger kalyan said...

Such a great information.

Thanks,
Kalyan

 
At Monday, August 01, 2011 , Blogger manish said...

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At Monday, August 01, 2011 , Blogger sonu said...

N I C E P O S T .............
THANKS FOR SHARINGH WITH US

 
At Monday, August 01, 2011 , Blogger Jitendra Sisoidya said...

HI
I like this this post & Interesting

 
At Monday, August 01, 2011 , Anonymous Anonymous said...

Its 2 gud guys.Very inspired and motivational quotes..
Cheers..
Prabhat Rai

 
At Monday, August 01, 2011 , Blogger Somya said...

Good Knowledge sharing here.

 
At Monday, August 01, 2011 , Blogger Prabaht Rai said...

Very Nice ...

 
At Monday, August 01, 2011 , Blogger vijaywebmaster89@mail.com said...

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At Monday, August 01, 2011 , Anonymous Anonymous said...

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At Monday, August 01, 2011 , Anonymous poonam said...

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At Monday, August 01, 2011 , Anonymous micky clarke said...

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At Monday, August 01, 2011 , Blogger Raman Taneja said...

Thanks for sharing thi susefull information, will definately consider this.

 
At Monday, August 01, 2011 , Blogger mayank said...

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At Monday, August 01, 2011 , Blogger sam said...

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At Monday, August 01, 2011 , Anonymous Crystal Travel said...

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At Monday, August 01, 2011 , Anonymous Hemant Sharma said...

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At Monday, August 01, 2011 , Blogger Antra said...

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At Monday, August 01, 2011 , Anonymous vikas pandey said...

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At Monday, August 01, 2011 , Blogger abhishek said...

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At Monday, August 01, 2011 , Blogger Raj Nandan Yadav said...

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At Monday, August 01, 2011 , Blogger London Serviced Apartment said...

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At Monday, August 01, 2011 , Blogger vivek said...

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At Monday, August 01, 2011 , Blogger Sourbh Tandon said...

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At Monday, August 01, 2011 , Blogger MANOJ KUMAR SINGh said...

Achha hai bhai bahut achha laga

 
At Monday, August 01, 2011 , Blogger Seo Expert said...

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At Monday, August 01, 2011 , Blogger rupesh jha said...

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At Tuesday, August 02, 2011 , Blogger rupak said...

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At Wednesday, August 03, 2011 , Anonymous Anonymous said...

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At Monday, August 08, 2011 , Anonymous Anonymous said...

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thnxxx.......

 
At Thursday, August 25, 2011 , Anonymous Anonymous said...

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