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क्यों होता है Emotional Atyachar ? बचने के कुछ tips.

AchchiKhabar.Com: क्यों होता है Emotional Atyachar ? बचने के कुछ tips.

Wednesday 29 December 2010

क्यों होता है Emotional Atyachar ? बचने के कुछ tips.

 



क्यों होता है Emotional Atyachar ? बचने के कुछ tips.

Emotional Atyachar  term की पैदाइश.  DEV-D के गाने तौबा-तेरा जलवा..तौबा तेरा प्यार...तेरा emotional अत्याचार .. के कोख से सन 2009 में हुई. बचपन से ही होनहार ये term बिना ज्यादा  समय गवाए बच्चे-बूढ़े  -जवान सबकी जुबान पे चढ गया.वैसे ऐसा नहीं है कि ये अचानक ही आसमान से टपक पड़ा है. इसके पूर्वज धोखा, फरेब, betrayal, आदि को हम सदियों से जानते हैं.एक बात ध्यान देने की ये है कि Emotional Atyachar तभी हो सकता है जब किन्ही दो लोगों की relationship में कम-से-कम एक serious और loyal हो.
 
अगर कुछ एक दशक पहले कि बात करें तो Emotional Atyachar बहुत ज्यादा देखने को नहीं मिलता था ..पर अब तो ये पान कि दूकान जितना आम हो गया है.... ये अक्सर आस-पड़ोस, गली-चौरहों, college की canteens और office के गलियारों में दिखाई दे जाता हैं ...हो सकता है आपके साथ भी ये हो चुका हो ...या आप किसी के साथ ये कर चुके हो..anything is possible.

खैर जो भी हो! मैं ये सोच रहा था कि आखिर अचानक इस अत्याचार में इतनी बढोत्तरी कहाँ से आ गयी...दो-तीन बातें मेरे दिमाग में आयीं....

पहली--- अगर कोई चीज आसानी से मिल जाये तो इंसान उसकी कीमत नहीं समझता. 
दस-बारह   साल पहले के प्रेमियों और आज कल के romeos में बहुत अंतर आ चुका है. पहले  किसी affair के जन्म लेने में उतना ही वक्त लगता था जितना कि बच्चे को पैदा होने में लगता है,..करीब नौ महीने. लड़का लड़की को देखता है....college में....office में...balcony में या फिर कहीं और....अब वो लड़की की गतिविधियों पे नज़र रखना शुरू करता है....वो कब घर से निकलती है...कहाँ जाती है...उसकी कौन सी सहेलियां हैं, उसका भाई.. भाई तो नहीं है...और कहीं उसका पहले से ही कोई चक्कर तो नहीं है...इतना सब homework करने के बाद ही लड़का आगे बढ़ता था....पर आज-कल तो कोई ज़रा सा भी अच्छा लगा तो बस facebook पे search किया थोड़ी line मारी ....ठीक रहा तो ठीक नहीं तो next...और आज नहीं  तो कल कोई न कोई  मिल ही जाता है...और हो जाता है affair शुरू.
तो पहले कि बात करें तो एक relationship develop करने में इतने पापड़ बेलने पड़ते थे की सिर्फ वही लोग हिम्मत करते थे जिन्हें वाकई में प्यार होता था ..पर आज कल mobile और internet ने ये सब कुछ इतना आसान बना दिया है कि हिम्मत करने जैसी कोई बात ही नहीं रही.... और इसका हर्जाना उन बेकसूरों को भुगतना पड़ता है जो सच-मुच किसी relationship को लेकर serious होते हैं...वो बेचारे समझते हैं कि उनका partner भी उतना ही serious है..पर अफ़सोस बहुत बार ऐसा नहीं होता है... 

अब आप ही सोचिये नौ महीने में मिले प्यार के ज्यादा टिकाऊ होने के chances हैं या नौ घंटे में मिले love के ??


दूसरी --- Value System  में बदलाव

अपने इस point को समझाने के लिए मैं एक latest example use करना चाहूँगा. क्या आपने- Band Baaza Baarat movie देखी है? मैं पिछले Saturday को ये movie देखी. इसमें hero और heroine जो अभी तक एक-दुसरे से प्यार .. भी नहीं करते हैं, बिना किसी prior motive के एक दुसरे के बहुत करीब आ जाते हैं..and finally they end up having sex with each other. अगर ये आठ-दस साल पुरानी मूवी होती तो क्या होता...शायद वो लोग guilty feel करते...पर   
अभी क्या होता है...लड़का सोचता है कहीं ये लड़की अब उसके गले न पड़ जाये ..और लड़की सोचती है चलो अब इसी से प्यार और शादी कर लेंगे. इस movie के हिसाब से शादी से पहले sex कोई बड़ी बात नहीं रही, और sex और प्यार को अलग-अलग देखा जा रहा है..the hero had sex but is in no mood to marry...क्योंकि वो लड़की से प्यार नहीं करता!!!
ये एक बड़ा बदलाव है. मुझे लगता है जो लोग अपने beloved या spouse के आलावा किसी और से relationship रखते हैं वो कुछ ऐसा ही  logic देते होंगे कि, भले मैं किस और के साथ relationship  में हूँ पर मैं प्यार तो उसी से करता हूँ. दरअसल ऐसे लोग बस खुद को अपनी ही नज़र में गिरने से बचाने  के लिए ऐसा सोचते  हैं ..वो अच्छी तरह से जानते हैं कि ये गलत है....पर ....????
तो value-system में आया बदलाव भी कुछ हद्द तक जिम्मेदार है...जो चीजें पहले बहुत बड़ा पाप होती थीं अब वो महज़ एक भूल बनकर रह गयी हैं. और भूल तो सभी से होती है.!!!

तीसरी – Peer Pressure / दोस्तों का दबाव

अगर आपका boyfriend या girlfriend; (obviously depending on your sex) नहीं है तो आपको backward समझा जाता है..... अरे!! क्या बात कर रही  है –तेरा  कोई boy-friend नहीं है”, मानो boy-friend न हो सांस कि नली हो कि इसके बिना मौत पक्की है. लेकिन क्या करियेगा जब तक आप अकेले हैं ये दोस्त-यार आपको घूरते रहेंगे  और और मजबूरन आपको जल्द से जल्द एक साथी ढूँढना पड़ेगा...इस जल्द्ब्जी में  दिल से करने वाला काम दिमाग से कर बैठेंगे...किसी cool guy या hot babe से relationship बना बैठेंगे. पर आपका दिल तो कुछ और ही तालाश करता रहेगा..और जिस दिन उसे वो मिली वो आपको Emotional Atyachar करने के लिए उकसाने लगेगा.  


 कैसे बचें Emotional Atyachar से:

  •  किसी committed relationship में जाने से पहले खुद को अच्छा-खासा वक्त दें. ज्यादा chance है कि अगर लड़का/लड़की serious नहीं है तो उससे ज्यादा दिन इन्तज़ार नहीं होगा..और आपको खुद-बखुद पता चल जायेगा.
  • Relationship कि शुरुआत में अपने partner को test करें...may be ये आपको थोडा अटपटा लगे पर बाद में पछताने से अच्छा है कि पहले ही सावधानियां बरत ली जायें. अब test कैसे करें ये आप अपने best friend से ही पूछ लें तो अच्छा है..पर किसी common friend से पूछने कि गलती मत कीजियेगा. और एक बार अगर बंद/बंदी सही निकल जाए तो फालतू में उसपे शक भी ना कीजिये. By the way अगर test के इस खेल में आप पकडे जाएँ तो मेरा नाम बता दीजियेगा..कहियेगा सारा दोष इसी का है...इसी ने ये घटिया idea दिया था.
  • अगर सब-कुछ ठीक-ठाक चलते चलते अचानक आपको ऐसा लगने लगे कि आपका partner cheat कर रहा है तो खुद से जानने कि कोशिश करें कि ऐसा आपको क्यों लग रहा है...आप थोडा alert हो जाइए अगर सच-मुच ऐसा हुआ तो कोई न कोई symptom दिख जायेगा..जैसे office से देर से आना , mobile का कुछ ज्यादा ही busy रहना,mail का password बदलना, etc ...पर मैं एक बार फिर कहना चाहूँगा कि ज़बरदस्ती का शक कभी न कीजिये...कई बार अच्छी खासी relationship बेबुनियाद शक कि वज़ह से बर्वाद हो जाती हैं.
  • अगर ऐसी मजबूरी आ जाये कि आपको अपने partner को छोड़ना पड़े तो भी आप सही तरीके से बात-चीत करके अपनी relationship को end कीजिये..बहुत हद्द तक आप खुद को अपने partner पे Emotional Atyachar करने से बचा पायेंगे...और कम-से-कम अपनी नज़रों में कुछ बेहतर स्थिति में होंगे.

जाते-जाते मैं एक बात कहना चाहूँगा...अगर आप सच्ची खुशी और एक everlasting relationship चाहते हैं तो Emotional Atyachar  नहीं Emotional Satyachar कीजिये. पहले तो काफी सोच-समझ कर ही किसी relationship   में खुद को  commit कीजिये और अगर एक बार जो commit कर दिया तो उसे पूरी सच्चाई और इमानदारी से निभाइए. Relationship में छोटी-मोटी problems तो आएँगी ही आयेंगी लेकिन इसका solution  Emotional Atyachar नहीं  Emotional Satyachar है. इस सत्याचार को अपना के देखिये जिंदगी खूबसूरत बन जायेगी. 

मैं ये इसलिए कह पा रहा हूँ क्योंकि मैंने हमेशा ही इसको follow किया है and I must say I am very happy to do that. इसका सबसे बड़ा फायदा खुद को ही होता है.आप अच्छा feel करते हैं कि आपने कभी किसी को धोखा नहीं दिया. धोखा खा के शायद कोई इतना बुरा न feel करे जितना वो धोखा दे के feel करेगा...तो फिर ऐसी feeling आने ही क्यों दी जाये..क्यों न Emotional Atyachar को छोड़ Emotional  Satyachar अपनाया जाये.   

यदि आपके पास भी Emotional Atyachar से बचने के कुछ tips हों तो कृपया जनहित में अपने comments के द्वारा बताएं.Thanks.  

 

Point to be noted:
मैंने इस article को mainly girlfriend/boyfriend relationship को ध्यान में रख के लिखा है. Married couples के लिए कुछ बाते तर्कसंगत हो सकती हैं पर मुख्यतः यह लेख unmarried लोगों को ध्यान में रख कर ही लिखा गया है.
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14 Comments:

At Wednesday, December 29, 2010 , Blogger babanpandey said...

बड़ा ही अच्छा लगा आपका emotional अत्याचार और उसे बचने के टिप्स
हम खुद ही अपनी समस्या की जड़ में है //

 
At Thursday, December 30, 2010 , Anonymous Mak said...

YES!!

IT'S REALLY SOBER ATTEMPT TO SHARE SOME INTERESTING AND USEFUL QUOTATION WHICH MAKE REFRESH US AFTER READING....THE WAY OF WRITING IS REALLY VERY DYNAMIC ...KEEP POSTING REGULAR .....

 
At Thursday, December 30, 2010 , Anonymous Bugaboo bee Online said...

बड़ा ही अच्छा लगा आपका emotional अत्याचार और उसे बचने के टिप्स
हम खुद ही अपनी समस्या की जड़ में है //
Really such anice blog. plz keep it up .

 
At Thursday, December 30, 2010 , Blogger sjflksd said...

Yes exactly . I am agreed .But how can we adopt Emotional stayachaar??Or agar koi jabardasti ka one sided relationship rakhna chahe to uska kya? Isn't it Good ki u should have to make distances or samne vale ko ye baat samjh leni chahiye that the person jisko aap jante ho he/she is not interested to kyu faltoo mein kisi k piche apna time waste karna ........Dats it.

 
At Thursday, December 30, 2010 , Anonymous Deepika said...

Its really good and important topic in this age.
i appreciate yours blog .
keep it up.
god bless you

 
At Thursday, December 30, 2010 , Blogger Jason Matthew said...

Nice blog frnd... :) n thanks for discuss this topic with us , i think its very useful for everyone..

Jason Matthew

 
At Friday, December 31, 2010 , Blogger Gopal Mishra said...

Thanks to all of you for appreciating this blog and post.

@sjflksd: Emotional Satyachar is nothing but being loyal to the person with whom you have a committed relationship.And I am sorry I didn't quite understand as to what is the hurdle in adopting Emotional Satyachar???And I agree with you that one should not commit herself/himself into one-sided relationship.

 
At Friday, December 31, 2010 , Blogger Patali-The-Village said...

बड़ा ही अच्छा लगा आपका emotional अत्याचार और उसे बचने के टिप्स| नए साल की ढेर सारी शुभकामनाएँ|

 
At Friday, December 31, 2010 , Blogger ZEAL said...

Wonderful suggestions !

 
At Saturday, January 01, 2011 , Blogger shikha said...

very valuable article to deal with a very delicate part of life.....one thing more i want to say ki agar aap is emotional atyachar ke shikaar ho hi gaye hain to take your self as a lucky one!!!!!!!! becoz its better to know the reality than to be in a illusion of a committed relationship and waste such a precious life with someone who doesn't actually deserve u.....just thank to god......

 
At Saturday, January 01, 2011 , Blogger Gopal Mishra said...

Thanks Shikha for such a valuable add-on to this article.

 
At Saturday, January 08, 2011 , Anonymous garima singh said...

best part is the tips u have given... i think these will really help a person to save the relationship from unnecessary Emotional Atyachar. and in the same way it will help a person to b out of a relationship...

 
At Thursday, February 24, 2011 , Blogger Prateek Pandey said...

very good n important blog..................specially for teenagers

 
At Wednesday, July 06, 2011 , Blogger Bhulan kumar shah said...

aapki blog bahut hi achhi2 sugg, deti hai...thanku..best of luck.

 

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